हाइब्रिड फूलगोभी 'खुशी' का कमाल, किसान हो रहे मालामाल
फूलगोभी आम तौर पर सबसे सुलभ उपलब्ध होने वाली सब्जी हैं। जिसका प्रयोग न केवल सब्जी बनाने बल्कि अलग-अलग स्वादिष्ट व्यंजन बनाने के लिए भी किया जाता है। यह सब्जी भले ही आम हो लेकिन फायदे बहुत ही खास होते हैं। फूल गोभी में कैल्शियम, फॉस्फोरस, प्रोटीन, कार्बोहाइड्रैट और लौह तत्व के अलावा विटामिन ए, बी, सी, आयोडीन, तांबा और पोटेशियम प्रचुर मात्रा में भी मौजूद होता है। इसका उपयोग ने केवल सब्जी बनाने के लिए होता है, बल्कि इससे मंचूररयन, सूप, अचार, परांठे भी बनाए जाते हैं। भारतीय व्यंजन के अलावा इसका उपयोग चाइनीस, कॉन्टिनेंटल डिशेस बनाने में भी किया जाता हैं यही कारण है कि यह सब्जी पूरे साल उगाई जाती हैं। इसके लिए फूलगोभी के हाइब्रिड सीड़ की मांग बहुत ज्यादा है। क्योंकि इस फसल पर मौसम का सबसे ज्यादा प्रभाव पड़ता है और साथ ही इस पर कीट, फफूंदी और गलन रोग से पूरी फसल नष्ट होने की संभावना रहती हैं। इन सब बातों को ध्यान में रख कर सोमानी सीड्स ने अपने कई वर्षों के अनुभव शौध और मेहनत के आधार पर उत्तर भारत के किसान भाइयों के लिए तीन महीने से ज्यादा लंबी सोइंग विंडो वाली हाईब्रिड सीडू को बाजार में उतारा है। जिसका नाम उन्होंने 'खुशी' रखा है। यह बीज न केवल लंबी सोइंग विंडो के लिए मशहूर है, बल्कि इसे रंग, रूप, वजन और लंबे परिवहन क्षमता के कारण भी किसान भाइयों की पहली पंसद बनती जा रही हैं।
किसान बूटा सिंह जी
चलिए आज हम आपको मिलवाते हैं। ऐसे ही एक खुशहाल किसान बूटा सिंह जी से जो पंजाब के जलंधर के गोपीपुर गाँव के रहने वाले है। वे इस वर्ष हाइब्रिड फूलगोभी 'खुशी' लगाकर खुश हैं। उनके अनुसार फूलगोभी 'खुशी' लगाने से लगभग ३५-४० हजार प्रति बीघा लाभ होता है। अगर इनकी मने तो एक बीघा जमीन के लिए २ पैकेट १० ग्राम के पाउच से लगभग ८०-८५ प्रतिशत जर्मिनेशन के हिसाब से ४ हजार ४०० सौ से ४ हजार सौ पौधा मिल जाता है। जिसको ६ इंच गुणा ६इंच की दूरी पर लगाया जाता है। किसान बूटा सिंह जी के मुताबिक, लगभग ६८ दिनों के बाद उनको फसल काटने लायक मिल गई थी। जिसे उन्होंने ४ से ५ बार दो-दो दिनों के अंतराल में काट कर बाजार में बेचा, परंपरागत तरीके से इन्हें पनियों में एक के ऊपर एक रखकर लगभग २८ से ३० फूल को जमा कर पैक किया। जिसका वजन ३० से ३२ किलोग्राम आया। इस तरह एक बार में लगभग २८ पन्नी से ३० पन्नी को २१० रूपए प्रति पन्नी बेच कर ६३ सौ रूपए कमाए तथा पांचवी बार १४७ पन्नी बेचने के बाद उनके हिस्से ३०,८७० रूपए आए। इस प्रकार इस साल फूलगोभी 'खुशी' की फसल लगाकर ३०,८७० रूपये की कमाई हुई। जिसमे यदि बीज की कीमत, नर्सरी प्रबंधन आटनो पर खर्च, ट्रांसप्लांटेशन का खर्चा तथा समय-समय पर सिंचाई रोग प्रंबधन, कीटनाशी, फफूंदीनाशी, कटाई, छटाई, पैकिंग और बाजार तथा ढुलाई पर लगभग ८-१० हजार का खर्च आता है इस तरह यदि हम इन खर्चों को कुल कमाई से घटा दिया जाए तो लगभग २००७० रूपए की बजत हुई। इस किसान भाई ने खुशी को अपना कर खुश रहने का बहाना तो खोज लिया है। अब आपकी बारी है सामानी सीड् आजमाने की............